बच्चे को प्री-स्कूल जाने के लिए कैसे तैयार करें? (Baby ko pre-school jane ke liye kaise taiyar kare)

आपको पता भी नहीं लगा और आपका नन्हा शिशु, एक नटखट बच्चे में बदल गया। आपकी ही तरह, ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चे को प्री-स्कूल भेजने के लिए थोड़े उत्साहित और थोड़े चिंतित होते हैं। ऐसे में आप भी सोच रहे होंगे कि उसे प्री-स्कूल जाने के लिए कैसे तैयार करें? असल में, कुछ बेहद छोटी छोटी चीजों के ज़रिए बच्चे को प्री-स्कूल जाने के लिए तैयार कर सकते हैं। इस ब्लॉग में हम आपको बता रहे हैं कि आप बच्चे को प्री-स्कूल जाने की तैयारी कैसे करवा सकते हैं। बच्चा किस उम्र में प्री-स्कूल जा सकता है? (Bacha kis umar me pre-school ja sakta hai) बच्चे को प्री-स्कूल जाने के लिए तैयार करने के 14 उपाय (Baby ko pre-school jane ke liye taiyar karne ke 14 upay)
  1. बच्चे को आप से अलग रहना सिखाएं (Baby ko apse alag rehna sikhaye)
  2. बच्चे को अन्य बच्चों के साथ खिलाने ले जाएं (Bache ko baki baccho ke sath khelne de)
  3. बच्चे को अपना काम खुद करना सिखाएं (Baby ko apna kaam khud karna sikhaye)
  4. बच्चे को टॉयलेट का इस्तेमाल करना सिखाएं (Bache ko toilet ka upyog karna sikhaye)
  5. बच्चे को बात करना सिखाएं (Bache ko baat karna sikhaye)
  6. बच्चे को खुद को साफ-सुथरा रखना सिखाएं (Bache ko khud ko saf-suthra rakhna sikhaye)
  7. बच्चे को प्री-स्कूल के बारे में कहानियां सुनाएँ (Bache ko pre-school ke bare me stories sunaye)
  8. बच्चे को एक दिनचर्या में ढालें (Bache ko ek dincharya me dhale)
  9. बच्चे को प्री-स्कूल दिखाने लेकर जाएं (Bache ko pre-school dikhane lekar jaye)
  10. बच्चे को स्कूल जाने वाले अन्य हमउम्र बच्चों से मिलवाएं (Bache ko uski age ke pre-school jane vale baccho se milaye)
  11. बच्चे के साथ खेलें (Bache ke sath khele)
  12. बच्चे को बाहर घुमाने ले जाएं (Bache ko bahar ghumane lekar jaye)
  13. बच्चे की भावनाओं को समझें (Bache ki bhavnao ko samjhe)
  14. बच्चे को तैयार होने के लिए पर्याप्त समय दें (Bache ko taiyar hone ke liye paryapt samay de)
बच्चा किस उम्र में प्री-स्कूल जा सकता है? (Bacha kis umar me pre-school ja sakta hai) आमतौर पर ज्यादातर बच्चे ढाई साल के होने के बाद प्री-स्कूल जाने की शुरुआत कर देते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ढाई साल का होते ही आप अपने बच्चे को प्री-स्कूल भेजना शुरू कर दें। इससे पहले यह समझना बहुत ज़रूरी है कि वह प्री-स्कूल जाने के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार है या नहीं। इसलिए आप अपने बच्चे की सुविधा के अनुसार उसे दो से चार वर्ष की उम्र में प्री-स्कूल भेजने की शुरुआत कर सकते हैं। बच्चे को प्री-स्कूल जाने के लिए तैयार करने के 14 उपाय (Baby ko pre-school jane ke liye taiyar karne ke 14 upay) बच्चे को स्कूल जाने के लिए तैयार करने में निम्न उपाय आपकी मदद कर सकते हैं -
  1. बच्चे को आप से अलग रहना सिखाएं (Baby ko apse alag rehna sikhaye) - जब बच्चे को प्री-स्कूल भेजने की बात आती है, तो माता-पिता के सामने सबसे बड़ी मुश्किल ये होती है कि वह उनसे दूर कैसे रह पाएगा। लेकिन, अगर आप पहले से इसकी तैयारी करें, तो यह एकदम आसान हो जाएगा।
बच्चे को खुद से अलग रहना सिखाने का सबसे अच्छा तरीका यह है, कि हर सप्ताहांत (वीकेंड) पर थोड़ी देर के लिए उसे कुछ रिश्तेदारों या दोस्तों के यहां लेकर जाएं। फिर उसे समझाएं कि आप थोड़ी देर में वापिस जाएंगे और वहां से चले जाएं। इससे बच्चे में अकेले रहने और नए माहौल में ढलने का आत्मविश्वास पैदा होगा। इसके साथ ही जब आप उसे वापिस लेने आएंगे, तो उसे इस बात का भी यकीन हो जाएगा कि आप उसे छोड़कर जाने के बाद, ज़रूर वापिस आएंगे।
  1. बच्चे को अन्य बच्चों के साथ खिलाने ले जाएं (Bache ko baki baccho ke sath khelne de) - प्री-स्कूल जाने की शुरुआत करने से पहले बच्चे का सामाजिक होना बेहद ज़रूरी है। इसलिए उसे अन्य बच्चों से घुलना - मिलना सिखाएं।
इसके लिए उसे रोज शाम को पार्क लेकर जाएं और उसके हम-उम्र बच्चों के साथ खेलने के लिए प्रेरित करें। इससे उसके व्यक्तित्व का विकास होगा और वह दोस्त बनाना सीख पाएगा। यह सीखना प्री-स्कूल जाने के लिए बेहद ज़रूरी है।
  1. बच्चे को अपना काम खुद करना सिखाएं (Baby ko apna kaam khud karna sikhaye) - अगर अभी भी आप अपने बच्चे के छोटे छोटे काम खुद करते हैं, तो अब ऐसा करना बंद कर दें। प्री-स्कूल जाने के लिए यह ज़रूरी है कि बच्चा अपने काम जैसे खाना-पीना, कपड़े पहनना, नाक साफ करना, हाथ धोना आदि खुद कर सके।
इसके लिए उसे एक बार में एक काम सिखाएं। जैसे बच्चे को पहले अपने हाथ खुद धोना सिखाएं, इसके बाद खुद खाना खाना, खुद को साफ रखना, फिर कपड़े पहनना आदि सिखाएं। इससे वह प्री-स्कूल में आपके बिना आसानी से रह सकेगा।
  1. बच्चे को टॉयलेट का इस्तेमाल करना सिखाएं (Bache ko toilet ka upyog karna sikhaye) - प्री-स्कूल जाने के लिए आपके बच्चे को टॉयलेट यानी शौचालय का उपयोग करना आना चाहिए। उसे सिखाएं कि शौचालय का उपयोग कैसे किया जाता है, इसे पॉटी ट्रेनिंग कहा जाता है।
इसके साथ ही उसे शौच लगने पर बताना सिखाएं, ताकि प्री-स्कूल में उसे किसी प्रकार की टॉयलेट सम्बंधी समस्या का सामना ना करना पड़े।
  1. बच्चे को बात करना सिखाएं (Bache ko baat karna sikhaye) - प्री-स्कूल जाने के लिए यह ज़रूरी है कि बच्चा अपनी ज़रूरतें बोलकर बता सके। दो - ढाई साल की उम्र तक अधिकांश बच्चे थोड़ा बहुत बोलना सीख जाते हैं, अगर आपका बच्चा ठीक से बोल नहीं पाता है, तो उसे बोलना सिखाएं।
इसके लिए उसे मज़ेदार कहानियां सुनाएं, उसके साथ किताबें पढ़ें और उससे बात करें। इससे वह न केवल बात करना सीखेगा, बल्कि उसकी सोचने व समझने की क्षमता भी बढ़ेगी।
  1. बच्चे को खुद को साफ-सुथरा रखना सिखाएं (Bache ko khud ko saf-suthra rakhna sikhaye) - प्री-स्कूल भेजने से पहले बच्चे को यह सिखाना बेहद ज़रूरी है कि खुद को साफ-सुथरा कैसे रखा जाए। लेकिन, आप एक ही दिन में बच्चे को यह सब नहीं सिखा सकते हैं, इसलिए उसे धीरे - धीरे, एक - एक करके अच्छी आदतें सिखाएं।
इसकी शुरुआत आप उसे खाना खाने से पहले हाथ धोना सिखाकर कर सकते हैं। इसके बाद धीरे - धीरे उसे अपना मुंह धोना - पौंछना, नाक साफ करना, और बिना गिराए खाना खाना सिखा सकते हैं। इन अच्छी आदतों से वह स्कूल में खुद को साफ रख सकेगा।
  1. बच्चे को प्री-स्कूल के बारे में कहानियां सुनाएँ (Bache ko pre-school ke bare me stories sunaye) - छोटे बच्चे कहानियां सुनकर जल्दी प्रेरित होते हैं। ऐसे में अपने बच्चे को प्री-स्कूल जाने के लिए मानसिक रूप से तैयार करने का सबसे बेहतर तरीका यही है, कि आप उसे प्री-स्कूल के बारे में रोमांचक कहानियां सुनाएं।
आप ये कहानियां किसी किताब में से पढ़कर सुना सकते हैं, या फिर अपने मन से बनाकर बच्चे को प्री-स्कूल के किस्से सुनाएं। किस्से - कहानियों के ज़रिए उसे समझाने की कोशिश करें, कि प्री-स्कूल कैसा होता है, वहां क्या नया होता है, वहां कैसे-कैसे लोग होते हैं, वो घर से अलग कैसे होता है, आदि।
  1. बच्चे को एक दिनचर्या में ढालें (Bache ko ek dincharya me dhale) - घर पर बच्चा अपनी मर्ज़ी से ज़िन्दगी जीता है, लेकिन प्री-स्कूल जाने के लिए उसे एक नियमित दिनचर्या का पालन करना होगा। इसलिए उसे एक नियमित दिनचर्या में ढालें।
इसके लिए उसे एक निश्चित समय पर सोना और जागना सिखाएं और उसमें निश्चित जगह बैठकर खाने-पीने की आदत विकसित करें।
  1. बच्चे को प्री-स्कूल दिखाने लेकर जाएं (Bache ko pre-school dikhane lekar jaye) - यह बच्चे के मन में छिपी आशंकाओं व डर को ख़त्म करने का सबसे प्रभावी उपाय है। आपके साथ प्री-स्कूल जाने से वो उस जगह को खुलकर जान पाएगा।
प्री-स्कूल शुरू होने से पहले अपने बच्चे को तीन से चार बार (या जितनी बार हो सके) वहां लेकर जाएं और घूमने दें। आप भी उसके साथ प्री-स्कूल का जायजा लें और यह सुनिश्चित करें कि वह बच्चे के लिए सही है या नहीं। इसके साथ ही, बच्चे को वहां की सभी चीजों के बारे में बताएं, जैसे "ये टॉयलेट है, आप यहां शौच कर सकते हैं", "ये आपकी कक्षा होगी, आप यहां आपके जैसे कई और बच्चों के साथ बैठेंगे", "ये खेल का मैदान या कमरा है, यहां आप खेल सकते हैं" आदि।
  1. बच्चे को स्कूल जाने वाले अन्य हमउम्र बच्चों से मिलवाएं (Bache ko uski age ke pre-school jane vale baccho se milaye) - बच्चे को उसकी उम्र के ऐसे बच्चों से मिलवाएं, जो प्री-स्कूल जाते हैं। उसे उनसे बात करने दें और उनके साथ वक़्त बिताने दें। इससे वह प्री-स्कूल के बारे में अच्छी तरह से समझ पाएगा और उसके मन की हिचकिचाहट दूर होने में मदद मिलेगी।
  1. बच्चे के साथ खेलें (Bache ke sath khele) - बच्चे की शारीरिक क्षमताओं को विकसित करने के लिए उसके साथ विभिन्न खेल जैसे गेंद फेंकना, लुका-छिपी, पकड़ा-पकड़ी आदि खेलें। इनसे उसकी मानसिक क्षमता भी बेहद तेजी से विकसित होती है और वह चीजों को ज्यादा बेहतर ढंग से समझने लगता है।
  1. बच्चे को बाहर घुमाने ले जाएं (Bache ko bahar ghumane lekar jaye) - ऐसा करना बच्चे को प्री-स्कूल जाने के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाता है। बाहर जाने पर बच्चा अलग माहौल व चीजों को समझने लगता है और उसमें विभिन्न परिस्थितियों में ढलने की क्षमता विकसित होती है।
बच्चे को कभी-कभी, एक या दो दिन के लिए बाहर लेकर जाएं। इससे वह घर से अलग रहने में सहज हो सकता है और उसमें बदलाव स्वीकार करने की क्षमता का विकास होता है। साथ ही, इस दौरान उससे ढेर सारी बातें करें और उसके साथ खेलें, ताकि वह बदलाव में ढल सके।
  1. बच्चे की भावनाओं को समझें (Bache ki bhavnao ko samjhe) - बच्चों का मन बहुत कोमल होता है और बेहद छोटी सी बात से भी उनके मन को ठेस पहुंच सकती है। इसलिए यह ज़रूरी है कि आप अपने बच्चे की भावनाओं को समझें। अगर वह प्री-स्कूल जाने से डर रहा है, तो उसके साथ ज़बरदस्ती करने के बजाय उसे थोड़ा समय दें।
इस दौरान विभिन्न तरीकों से उसके डर को दूर करने की कोशिश करें, जैसे उसे प्री-स्कूल दिखाकर लाएं और उसे प्री-स्कूल जाने वाले अन्य बच्चों से मिलवाएं। इसके साथ ही उसकी बातें ध्यान से सुनें और जानने की कोशिश करें कि वह कैसा महसूस कर रहा है। उसे बताएं कि जब आप पहली बार स्कूल गए थे, तो आपको कैसा लगा था और उसके डर के बारे में खुलकर बात करें। बच्चे को इस बात का एहसास करवाएं कि उसका डर स्वाभाविक है, लेकिन प्री-स्कूल जाने में डरने की कोई बात नहीं है।
  1. बच्चे को तैयार होने के लिए पर्याप्त समय दें (Bache ko taiyar hone ke liye samay de) - प्री-स्कूल बच्चे के लिए एक बिल्कुल अलग दुनिया की तरह होता है, इसके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार होने में उसे थोड़ा समय लग सकता है। इसलिए बच्चे पर अपनी उम्मीदों का बोझ ना लादें और उसे अपने आप तैयार होने दें।
इसके लिए सबसे बेहतर उपाय यही है, कि आप उसे करीब तीन - चार महीने पहले से प्री-स्कूल के बारे में बताना शुरू करें। धीरे धीरे वह सहज हो जाएगा और उसे प्री-स्कूल जाने में पहले की तुलना में बेहद कम डर लगेगा। बच्चे को प्री-स्कूल के लिए तैयार करना आपको बेहद मुश्किल लग सकता है, लेकिन अगर आप ब्लॉग में बताए गए उपाय आजमाएंगे, तो आपको ये बेहद आसान लगने लगेगा। यह आपके बच्चे के बढ़ने और दुनिया को जानने का सही वक़्त होता है, इसलिए उसे सही मार्गदर्शन दें और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।

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